18 December, 2012

ब्लू डनहिल्स

नथिंग एक्स्ट्राआर्डिनरी...मुझे उसकी कोई बात याद नहीं है...सिवाए इसके कि ही यूज्ड टु स्मोक ब्लू डनहिल्स. मैंने उतना खूबसूरत सिगरेट का डब्बा पहले कभी नहीं देखा था. नीले समंदर जैसा नीला...कि लगे प्यार का कोई रंग होता है तो ऐसा ही हो कि ये नीला रंग मेरी आँखों को रंग जाये...सफ़ेद सिगरेटें और उनपर डनहिल का मैरून रंग का लोगो...उसके हाथों में वो सिगरेट जितनी खूबसूरत लगती थी, उसके होटों पर उससे कहीं ज्यादा कातिल. उसे सिगरेट पीते हुए देख कर यकीन पक्का हो जाता था कि स्मोकिंग किल्स. 
मुझे उसकी सादगी भा गयी थी. सादगी को कैरी ऑफ करना सबसे मुश्किल होता है. वो सफ़ेद शर्ट और ब्लू जींस पहनता...उसके पहनावे में ऐसा कुछ भी नहीं था जो आपका ध्यान भटका सके. किसी भी दिन कोई सरप्राइज नहीं कि आज क्या पहन कर आएगा...किस रंग में कैसा दिखेगा...रोज का सफ़ेद रंग और रोज़ का दिखना वही...कातिल. सफ़ेद रंग पर कोई भी प्रोजेक्शन किया जा सकता है. सफ़ेद सारे रंगों को सोख सकता है. उसे जानते हुए ऐसा लगता था कि उसका मन भी ऐसे ही कोरा है...समंदर के किनारे हाई टाइड के बाद के सफ़ेद रेत जैसा...कि अभी इसपर किसी का नाम नहीं लिखा गया है. सफ़ेद रंग कोरे कैनवास सा होता है...बहुत कुछ करने को उकसाता है. मेरा अक्सर मन करता कि इंक पेन झटकते हुए उसकी तरफ हाथ कर दूं...कि फिरोजी सियाही की बूँदें...छोटी-गोल-गोल एक दूसरे से थोड़ी छोटी होती हुयी उसके दिल को रंग जाएँ आसमानी. 

इत्तिफाक. बड़े खतरनाक टाईप के होते हैं. दो दिन का वीकेंड था तो पार्क में शांत से बैठ कर कोई किताब पढ़ने का मन था. घर से निकली तो बैगपैक में एक किताब, एक कोपी, कलम, चोकलेट, एक पैकेट बिस्किट, पानी और वालेट था. पार्क में दिन में कोई आता नहीं तो पेड़ों की खुसपुस और चिड़ियों की खिचपिच के अलावा कोई इंसानी आवाज़ परेशान नहीं करती. अक्सर का जाना है...बेंच पर सर के नीचे बैग को तकिये की तरह टिकाया और लेट कर किताब खोली. दो पन्ने पढ़े थे कि परफ्यूम की खुशबू आई...मस्की सा कुछ...ओल्ड स्पाईस की याद दिलाता हुआ. 

'डु यु माइंड?' 
ये नहीं हो सकता...मैं फिर से उसके बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगी हूँ...मेरा दिमाग ख़राब हो गया है...वो यहाँ कैसे आ सकता है...सच में आ सकता है क्या...इतना सारा कुछ फ्रैक्शन ऑफ़ सेकण्ड में सोच गयी...और हड़बड़ा के उठी. वो इतना खुश क्यूँ हो रहा था जैसे कोई खजाना मिल गया है. इतने बड़े पार्क में मेरी ही सीट पर बैठना जरूरी था उसको...माइंड...ऑफ़ कोर्स आई माइंड...माय फुट. एक दिन चैन से रहने नहीं देता कमबख्त. वो जाहिर तौर से बहुत खुश था कि मैं चौंक रही हूँ. 

'सो...तुम यहाँ?'
'मैं यहाँ रहती हूँ'
'पार्क में...ओहो हो...बुरा हुआ यार...घर नहीं है तुम्हारा, मुझसे कहा क्यूँ नहीं'
'ए, मैड और व्हाट...पार्क में नहीं...यहाँ पास में रहती हूँ'
'अच्छा...तो साफ़ बोलना था न, कन्फ्यूज कर रही हो...मैंने सोचा मैं भी टेंट वेंट लेकर आ जाऊं...यहीं पास में रह लेंगे, मैगी खा कर तुम जी तो लोगी न'
'क्या?!'
जब वो इस तरह बक-बक किये जाता था तो मुझे वो पुरानी कहावतें और किताबें याद आती थीं जिनमें लिखा होता था कि द बेस्ट वे तो शट समवन अप...इस विद अ किस. मैंने किताब से उसे कंधे पर मारा तो इतना ड्रामेटिक पोज बना कर गिरने की एक्टिंग की जैसे बेहोश ही हो जाएगा. उसे सम्हालने की कोशिश की तो कहता है...'यू कुड हैव सिम्पली आस्कड फॉर अ हग...इतना ड्रामा करने की क्या जरूरत थी.' गया मेरा संडे और गयी मेरी किताब...जाने दो गैलेक्सीज के बीच फंसे आंद्रे इवानाविच किस विच के चक्कर में पड़ेगा...कौन से प्लैनेट पर उतरेगा...मुझे चिंता हो रही थी उसकी मगर सोचा जाने दो...किताब लिखी जा चुकी है...अब जिस भी प्लैनेट पर इवान जाएगा उसके ऑथर की टेंशन है. मैं इस सरफिरे को सम्हालती हूँ पहले. 

उसमें कोई जेंटलमैन वाले मैनर्स नहीं थे...मेरा बैग खोल के बैठ गया...ओहो...रम एंड रेजिन...आई हेट रेजिन्स पर तुम्हारे लिए स्वीटहार्ट...आई विल हैव देम. ये लड़का पागल है क्या...कितनी लड़कियों को स्वीटहार्ट बुलाता है? इसे किसी ने बताया नहीं कि लड़कियां इन बातों को सीरियसली लेती हैं. और मेरी चोकलेट क्यूँ खा रहा है...अरे मुझसे पूछो तो सही...हद्द है. मैं किसी भी ऐरेगैरे के साथ चोकलेट नहीं शेयर करती. दिल ने गालियाँ दी...झूटी...वो ऐरागैरा नहीं है...चुप बैठ. मैं बेंच पर बैठी पाँव हिला रही हूँ और देख रही हूँ कि आज उसने शॉर्ट्स और टी-शर्ट्स पहनी हैं यहीं कहीं रहता होगा शायद...किसी खिड़की से मुझे देखा होगा क्या? 

'सो, व्हाट प्लान्स फॉर द डे माय लव?'
कसम से उसे बहुत बहुत सारा पीटने का मन किया...मैं उसकी 'माय लव' कब से हो गयी...और इतने प्यार से मुझसे क्यूँ बात कर रहा है...कटखना...वैसे तो हमेशा खिंचाई करने को दौड़ता है. दुष्ट. पापी.
'प्लान्स की तो तुमने बत्ती लगा दी...अब बोलो मेरे दिन का क्या करना है...एनी थिंग यू से. दिन आपका हुआ'
'सच्ची?'
'पक्का'
'प्रोमिस कि जो बोलूँगा वो करोगी?'
'हाँ, अन्लेस यू प्लान तो इन्वोल्व मी इन अ मर्डर'
'ना...मगर उससे ज्यादा टफ काम है'
और एक सेकण्ड के अन्दर वो घुटनों के बल नीचे बैठ गया...मेरा एक हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया
'प्लीज मेरे घर चल कर मेरे लिए आलू के पराठे बना दो प्लीज'
'तुम पागल हो क्या?'
'तुमने प्रोमिस किया था'
'मुझे खाना बनाना एकदम पसंद नहीं है...और तुम कब से इन्डियन फ़ूड पसंद करने लगे?'
'जब से तुम्हारे हाथ का पराठा खाया है, कसम से...तुम बहुत अवसम पराठे बनाती हो...प्लीज, प्लीज, प्लीज'
ये लड़का एकदम पागल है...और मैं उससे बड़ी पागल हूँ...अब उसके घर तो नहीं जाउंगी...अपने अपार्टमेंट जाना सही रहेगा क्या...वैसे तो उसे जानती हूँ...आलू पराठे का रोना रो रहा है तो उसके अलावा किसी चीज़ को देखेगा भी नहीं...फिर भी...घर पर...अकेले?
मोबाइल पर किजास किजास गा रहा था नैट किंग कोल...और ये खुराफाती घूम घूम कर मेरे घर की चीज़ें देख रहा था...उसका कौतूहल कभी कभी एक बच्चे जैसा लगता था मुझे. हर चीज़ पर सवाल...जैसे पहले कभी देखा न हो. फाइनली जा कर अटक गया मेरे ड्रेसिंग टेबल पर. 
'मैं हमेशा सोचता था कि तुम कौन सा परफ्यूम लगाती हो...मगर तुम्हारा परफ्यूम भी तुम्हारी खुशबू नहीं देता...क्या तुम्हारी भी नाभि से सुगंध फूटती है?'
'नहीं...मेरे हाथों से गंध आती है...देखो, प्याज, अदरक, लहसुन और हल्दी की...कमबख्त आलू का पराठा...छुट्टी ख़त्म हो गयी'
'आई विल मेक इट अप टु यु, आई प्रोमिस'
'बस...झूठे वादों पर जिंदगी कट रही है मेरी...प्रोमिस माय फुट'
कितना सारा दर्द अचानक से याद आ गया था कि आँखें भर आयीं...
'एक दिन खाना बनाने में इतना ड्रामा, बाकी जिंदगी क्या भूखा रखोगी मुझे?'
और मैं सोच रही थी कि हमने कब वादा किया पूरी जिंदगी साथ रहने का कि मुझे याद नहीं है...और कि इसको कोई समझाए ऐसी बड़ी बड़ी बातें मज़ाक में नहीं करते. वो एक बार कहेगा पर मैं पूरी जिंदगी वहीं अटकी रह जाउंगी. 
शामें हमेशा सिंगल माल्ट के नाम होती थीं...मगर आज उसकी जिद पर हम कोनियाक पी रहे थे. मुझे याद भी नहीं मैंने शैम्पेन ग्लासेस कब ख़रीदे थे...आज पहली बार इस्तेमाल हुए थे लेकिन. उसका वादा था...सिर्फ एक ड्रिंक और फिर वो अपने घर चला जाएगा...छत पर मेरी रोकिंग चेयर थी और उसकी नार्मल चेयर फिर भी दुनिया उसकी ज्यादा घूम रही थी. साइड टेबल पर एक पैकेट ब्लू डनहिल्स, मेरी मार्लबोरो और बहुत से किस्से रखे थे. 
....
कमबख्त ऑफिस...जाने ये कहानी पूरी भी कर पाउंगी कि नहीं....इसलिए सुबह लेट हो जाए तो कुछ लिखने नहीं बैठती हूँ...काश अभी कोई होता जो दिमाग के आइडियाज को शोर्ट हैण्ड में लिख लेता तो ये कहानी पूरी हो जाती...
शेष. फिर. कभी. शायद. 

2 comments:

  1. ये रोमांटिक कहानी रोचक हो रही थी कि तभी हम आखिरी लाइन पर थे। बाकि कहानी का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
    (मेरे ब्लॉग पर आपका कमेंट मिले तो .....)

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