25 December, 2012

ब्लू डनहिल्स- पास्ता विद ब्लैक कॉफी

कोई विदेशी वायलिन की धुन थी. शाम के ताने बाने से मेरे लिए दुशाला तैयार कर रही थी. 
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घुसपैठिया...डाकू...जाने मन के किस किस कोने पैठ गयी थी उसकी याद...सुबह कब नींद खुली याद नहीं बस ये याद था कि सपने में उसे देखा है, बहुत पास से. किसी थ्री डी अनिमेशन की तरह वो पास था...इतने करीब कि हाथ बढ़ा कर छू सकती थी उसे.

बेड से उठती हूँ तो तीखा सरदर्द होता है. मुझे शायद ही कभी जिंदगी में हैंगोवर हुआ है. मैं हमेशा तमीज से पीने वाले लोगों में से हूँ...ड्रिंक्स स्पेस आउट करना...बीच में खाना, पानी पीना और कभी ड्रिंक्स मिक्स नहीं करना. लेकिन कोनियैक और व्हिस्की का मिक्स जानलेवा हो गया. सर दर्द के मारे जान जा रही थी. अपने अकेलेपन को अजीब बेतरतीबी से महसूस किया. हालाँकि फोन करने से होम डिलीवरी वाले हर चीज़ पहुंचा देते मगर सर फटने वाले दर्द पर अमृतांजन लगाने वाली कोई सर्विस अभी शुरू नहीं हुयी है.

एक हाथ से शरबत बनाना मुश्किल होता है...खास तौर से तब जब दूसरे हाथ से खुद का सर दबाना पड़ रहा हो. ऐसे बहुत सारे ज्ञान का कोई हासिल नहीं निकलने वाला था...जरूरी था कोने पर की दूकान से जा कर गैटोरेड खरीदना या फिर नारियल पानी पीना. अंडे का कार्टन भी खाली था, सन्डे की शोपिंग करनी थी आज. आश्चर्य ये था कि इतने पर भी मेरा मूड ख़राब नहीं हो रहा था. अवोकाडो पड़े थे फ्रिज में, टमाटर के साथ मिला कर सैंडविच बनाये तो कुछ चैन आया. हॉट एंड कोल्ड शावर लेने से दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है और सरदर्द चला जाता है, ऐसा कुछ किसी दोस्त ने बताया था. कब? कितने साल पहले? याद नहीं.

हॉट शावर...दिसंबर की ठंढ में जलते अलाव जैसा उसका चेहरा...या जेठ की गर्मियां...सोचो सोचो. मैं शायद दुनिया के उन एक्स्टिंट लोगों में से एक होउंगी जो अभी भी साल को सावन, भादो, आशिन, कातिक जैसे महीनों से याद रखती हूँ. इन महीनों में दादी के चेहरे की मुस्कुराती झुर्रियां हैं. हॉट शावर...उसके मेरे साथ होने पर मेरी दोस्तों की आँखों में इर्ष्या की लपटें...दोस्त...कौन? अब तो कोई मुझसे मिलने नहीं आतीं, सब अपने पति को लेकर इनसेक्योर फील करती हैं मेरे इर्द गिर्द. अलोन एंड इनविंसिबल. किसीने मुझे सिखाया था. तुम अकेली हो और अजेय हो.

कोल्ड शावर...स्वीटहार्ट...उफ़. वो मेरे साथ फ्लर्ट कर रहा था...मैं जानती हूँ...सच्चाई...जिंदगी, दुनिया...उसे मुझमें कोई इंटरेस्ट नहीं है. मगर वो मुझसे बात क्यूँ कर रहा था...मैंने तो उसे कभी ऐसा सिग्नल नहीं दिया कि मुझे किसी की जरूरत है. एक सेकण्ड. मैंने अभी खुद कहा कि मुझे उसकी जरूरत है. एक पुरानी याद से पर्दा धुलता है तो पाती हूँ एक पुरानी शाम, एक पार्टी की प्लानिंग कर रही थी दोस्त के साथ तो लोगों को फोन करके कन्फर्म करने का काम मेरा था...उसे फोन किया था...पार्टी है, थीम...लेकिन उसने कहा था, अरे गोली मारो पार्टी को...ये बताओ तुम कैसी हो. मैंने जाने कितनी बातें की थी उससे...फिर उसे अचानक किसी ने बुलाया और उसने कहा...कमिंग, ओके, लव यू, बाय. मैं इधर भौंचक रह गयी थी कि ऐसा भी कोई होता है जिसे लव यू बोलने की आदत होती है...कि कितने लोगों को वो लव यू, बाय बोलता है. बात कहीं खो गयी थी मगर आज कोल्ड शावर में जैसे धुल धुला कर सामने खड़ी थी.

सर दर्द थोड़ा कम हुआ तो दिन के काम की लिस्ट सामने पड़ी थी...मेरा आज कहीं जाने का मन नहीं था...घर पर रह कर कुछ काम निपटा लिए जाएँ. डिलीवरी के लिए हफ्ते भर की सब्जियां, फल, दूध आर्डर कर दिया...साथ में पास्ता खाने का मन कर रहा था. स्पिनैच मशरूम पास्ता...थियेटर सिस्टम में क्लासिकल म्यूजिक लगा दिया...पास्ता बनाने में एक रोमांस है जो मेरे बुरे से बुरे मूड और हैंगोवर को ठीक कर देता है. चाहे पास्ता बॉईल करना हो, मशरूम के छोटे टुकड़े करने हो या सौस प्रेपरेशन. मुझे खाना बनाना ख़ास पसंद नहीं है...बस कभी कभी मूड होता है तो मन से खाना बनाती हूँ. घर बनवाते वक्त कितनी रिसर्च की थी, जर्मन किचन कैबिनेट्स, हलके से छूते ही किसी बैले डांसर की तरह स्मूथ मूवमेंट होती है उसकी. खुशबू इतनी अच्छी थी कि अगर म्यूजिक लाइव होता तो किसी का कुछ प्ले करने का मन नहीं करता...सब प्लेट लेकर पास्ता मांगने पहुँच जाते. पास्ता के साथ ब्लैक कॉफ़ी. डाइनिंग टेबल पर वास में डेकोरेटेड लिली...कभी कभी तरतीबी से रखी चीज़ों में कितना सुख मिलता है.

पहला कौर खाया था की मोबाईल बज उठा...किसका कॉल हो सकता है...देखती हूँ उसका नंबर फ्लैश हो रहा है...उठाऊं? छोड़ दूं?
'क्या कर रही हो?'
'पास्ता खा रही हूँ'
'अरे वाह! मेरा भी पास्ता खाने का मन था...आ जाऊं?'
'आई हैव मेड ओनली फॉर मायसेल्फ'
'वी विल शेयर...मुझे कोई दिक्कत नहीं है, मैं २ मिनट में पहुँच रहा हूँ.'
अरे कमबख्त मुझे दिक्कत है...भुक्खड़ कहीं का...कितने शौक़ से पास्ता बनाया था...मैं अरमान से पास्ता की प्लेट को देख रही थी कि दरवाजे की घंटी बजी. वो शायद शावर से सीधे निकल कर आया था. लाइम सी कोई खुशबू थी उसके इर्द गिर्द...लिरिल जैसी. अच्छा लग रहा था. जींस और लाईट एप्पल ग्रीन का शोर्ट कुरता था...खादी या लिनन का. फोर्क लेकर बैठ गया बगल वाली चेयर पर.

'किसी से इसलिए शादी करना कि उसे बेहतरीन खाना बनाना आता है, कितना सही लगता है तुम्हें?'
'हमें कहा गया है कि खाने की टेबल पर बात नहीं करते'

उसके इर्द गिर्द रहते हुए अजीब महसूस होता है, जैसे वो अचानक ही हवा में घुल जाएगा, किसी तिलिस्म सा...हाथ बढ़ा कर शायद छूना चाहूंगी तो वो रहेगा ही नहीं. उसके बारे में कुछ तो एकदम टेम्पररी था. लम्हे भर जैसा. जैसे हम किसी दो दुनिया के लोग थे. अचानक से कहीं एक वॉर्महोल खुला और इस दुनिया और उस दुनिया के बीच एक खिड़की बन गयी. वो फिर अपनी दुनिया में वापस चला जाएगा.

'तुमने जो ये दुनिया बनायी है, इतनी खूबसूरत है कि इसमें बस जाने का मन करता है. ऐसा लगता है कि सब कुछ सिरे से ऐसे रखा गया है कि हर जगह थोड़ी सी जगह बाकी है, सिर्फ मेरे आ जाने से ये सब कम्प्लीट हो जाएगा...फुल सर्किल.' वो फिर से जैसे खुद से बात कर रहा था.

जाहिर है, उसे खाते समय चुप रहने को नहीं सिखाया गया था. उसके आने के पहले मुझे कभी नहीं लगा था कि मेरी दुनिया में वाकई किसी की जगह भी बन सकती है...या उसके शब्दों में किसी की जगह पहले से है. पर अब बार बार लगने लगा था कि उसके जाने के बाद एक वैक्यूम बन जाएगा जिसे मेरे असिमोव के नोवेल्स, पास्ता, व्हिस्की, लॉन्ग ड्राइव्स भी भर नहीं पायेंगे. एक मास्टरपीस पेंटिंग में उसे बनाने वाले के सिग्नेचर की जगह रहती है, भले ही पेंटिंग में आउट ऑफ़ प्लेस लगे.

एक पूरे दिन की मोहलत थी हमें...भागते लम्हों को किन शीशियों में बंद किया जाए?

6 comments:

  1. उसके बारे में कुछ तो एकदम टेम्पररी था. लम्हे भर जैसा. जैसे हम किसी दो दुनिया के लोग थे....

    speechless :(

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  2. बार बार लगने लगा उसके जाने के बाद कुछ खाली रह जायेगा। बहुत बढ़िया रोमांटिक कहानी।

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  3. बहुत सुनदर आपके द्वारा रचित हर रचना बहुत हि उतम होती हे

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  4. गर्म पानी पीने और ठंडे पानी से नहा लेने पर सर दर्द चला जाता है, पर निदान उस पर भी निर्भर करता है कि दर्द आता कैसे है?

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  5. pata hai aaj ek test kara, aapki post padh raha hun aur saath mein full volume pe DEATH METAL baj raha hai. bilkul symphony hai :)

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  6. bahut sundar...bandh k rakh deti h aap....

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