एक पूरे दिन की मोहलत थी हमें...भागते लम्हों को किन शीशियों में बंद किया जाए?
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सिनेमाहाल का नीम अँधेरा मुझ पर हौले हौले काबिज होता जाता है. बहुत साल पहले नदी किनारे छुट्टियाँ मनाने गयी थी...नदी में चाँद की परछाई झिलमिल कर रही थी. सिनेमाहाल का पर्दा मुझे नदी की वैसी ही सतह सा लग रहा था.
थोड़े से नशे के बाद सारे लोग अच्छे डांसर हो जाते हैं मगर जे यहाँ भी अद्भुत था. फेस्टिवल में आये लोगों के साथ किसी लोकगीत में ऐसे घुलमिल गया था जैसे यहीं का बाशिंदा हो...ऐसे ही होते हैं न यायावर...किसी जमीन के नहीं और सारी जमीनों के एक साथ. उसके साथ डांस करते हुए लगता रहा था कि वाकई धरती किसी के प्रेम में ही अपनी धुरी पर घूम रही है. थोड़ी देर तेज़ संगीत के बाद कोई धीमी धुन बजती है. लोग थोड़ी देर को रुके हैं...मगर जे ने मेरी हथेली अपने सीने पर रखी है और अपनी हथेली से उसे कवर किया है. हम एक बेहद स्लो मोशन में डांस कर रहे हैं. वो संगीत के साथ मेरी धड़कन में घुलता जा रहा है.
शहर के घड़ियाल में बारह बजते हैं...पहली 'टन' की आवाज़ के साथ संगीत तेज़ होता है और सारे लोग फिर से गोल घेरा बना कर डांस करने लगते हैं...घड़ियाल की हर आवाज़ के साथ संगीत तेज़ और तेज़ होता जाता है और हमारे आस पास के लोग ब्लर होने लगते हैं. इस सारे केओस के बीच मैं जे की बाँहों में हूँ...मेरे लिए सब रुका हुआ है. उसने मेरे चेहरे को अपनी हथेलियों में भरा है और पूरा आसमान तारों के साथ नीचे झुक आता है कि जब उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए हैं...ऑलिव्स...उसके होटों का स्वाद...थोड़ा नमकीन, थोड़ा अबूझ...हमने लास्ट ड्रिंक कौन सी पी थी? मार्टीनी...मैंने आखिरी बार सांस कब ली थी? याद...
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सिनेमाहाल का नीम अँधेरा मुझ पर हौले हौले काबिज होता जाता है. बहुत साल पहले नदी किनारे छुट्टियाँ मनाने गयी थी...नदी में चाँद की परछाई झिलमिल कर रही थी. सिनेमाहाल का पर्दा मुझे नदी की वैसी ही सतह सा लग रहा था.
कहानी लम्बी है, इसलिए आज नाम के पहले अक्षर से शुरू करते हैं ''J" ना ना...मेरी जान वाला जे नहीं...सिर्फ जे. मैं उसे जे कहती थी...मेरी बगल वाली सीट पर बैठा एकटुक सिनेमा स्क्रीन को देख रहा है. जाने पलकें झपकाता भी है या नहीं. फिल्म की अलग दुनिया थी...मेरे साथ बैठे जे के साथ एक अलग दुनिया और एक दुनिया थी आंद्रे इवानाविच की...जिसके प्यार में मैं कई दिनों से पागल थी.
'तुम्हें क्या चाहिए आंद्रे इवानाविच?' मैं किसी पैरलल दुनिया से उससे पूछती हूँ. परदे पर चलती फिल्म का संगीत मेरे इर्द गिर्द रेशम का ककून बन रहा है. आंद्रे को इस दुनिया में कितनी तन्हाई मिली होगी कि वो कई गैलेक्सीज दूर जीवन की खोज में भटकने को तैयार हो गया होगा. अगर उसकी इस दुनिया में ही एक खुशनुमा बीवी होती, दो गोलमटोल बच्चे होते, एक कुत्ता होता तो क्या वो कई प्रकाशवर्ष दूर जा पाता? कहानी में उसका किरदार कुछ कुछ मेरी ही तरह है...भटकता हुआ...ठहराव में उसका भी दम घुटने लगता है. अगर मुझे आंद्रे अपने साथ उस स्पेस-शिप में चलने को कहता तो क्या मैं चल देती? और जे क्या करता फिर?
जे का फ्रेंड सर्किल बहुत बड़ा है, हर वीकेंड उसके पास अनगिन पार्टियों के इनविटेशन रहते हैं. अनगिन औरतें उसपर अपना दिल निछावर किये रहती हैं. मुझे उसकी आँखों में इतनी बेचैनी क्यूँ दिखती है? या कि उसका चेहरा सिर्फ आइना है और मुझे अपनी ही बेचैनी का प्रतिबिम्ब दिखता है? हम दोनों में से किसी को वालेट में ज्यादा कैश रखने की आदत नहीं है लिहाजा दोनों के पैसे जोड़ कर एक पोपकोर्न ही ख़रीदा जा सका. बीच बीच में हमारी उँगलियाँ एक दूसरे से छू जाती हैं और मैं जाने क्यूँ सोचती हूँ कि मैं उसके कंधे पर सर टिकाना चाहती हूँ. जे ऐसी ख्वाहिशों का पिटारा है जो मैं बहुत साल पहले नदी में बहा आई थी.
किसी दूसरे देश में पहुँच गयी हूँ...वहां बर्फ से ढकी सड़कें हैं. मैं और जे एक बेंच पर बैठे सिगरेट पी रहे हैं...सफ़ेद के उस विस्तार में उसकी ब्लू डनहिल्स किसी राशियन नर्तकी की नीली आँखों की याद दिलाती है. अपने दस्ताने वापस पहनने के पहले उसने मेरे हाथों को अपने हाथ में लिया है...उसके हाथ बेहद ठंढे हैं. धीरे धीरे मेरे हाथों से भी सारी गर्मी जाती रहती है...उसकी आँखों में कोई बचपन की शरारत नज़र आती है. हमें सैल्स्बर्ग फेस्टिवल जाना था, मोजार्ट को सुनने. वो मुझे पूरी ड्राइव अपने पसंदीदा क्लासिक म्यूजिशियंस के बारे में बताता रहा है. कार में सिम्फोनी ४० बज रही है. सैल्ज्बर्ग में दूर दूर से आये लोग हैं...हम भी अपना टेंट लगा रहे हैं. हवा में वसंत की खुशबू है. पास ही एक छोटे टेंट में बगल की गाँव से आया एक परिवार है...उन्होंने घर में बनायी शराब के बड़े बड़े ड्रम रखे हैं. ड्रम में लगी टोटी से जे और मैंने अपने ग्लास भर लिए हैं.
थोड़े से नशे के बाद सारे लोग अच्छे डांसर हो जाते हैं मगर जे यहाँ भी अद्भुत था. फेस्टिवल में आये लोगों के साथ किसी लोकगीत में ऐसे घुलमिल गया था जैसे यहीं का बाशिंदा हो...ऐसे ही होते हैं न यायावर...किसी जमीन के नहीं और सारी जमीनों के एक साथ. उसके साथ डांस करते हुए लगता रहा था कि वाकई धरती किसी के प्रेम में ही अपनी धुरी पर घूम रही है. थोड़ी देर तेज़ संगीत के बाद कोई धीमी धुन बजती है. लोग थोड़ी देर को रुके हैं...मगर जे ने मेरी हथेली अपने सीने पर रखी है और अपनी हथेली से उसे कवर किया है. हम एक बेहद स्लो मोशन में डांस कर रहे हैं. वो संगीत के साथ मेरी धड़कन में घुलता जा रहा है.
शहर के घड़ियाल में बारह बजते हैं...पहली 'टन' की आवाज़ के साथ संगीत तेज़ होता है और सारे लोग फिर से गोल घेरा बना कर डांस करने लगते हैं...घड़ियाल की हर आवाज़ के साथ संगीत तेज़ और तेज़ होता जाता है और हमारे आस पास के लोग ब्लर होने लगते हैं. इस सारे केओस के बीच मैं जे की बाँहों में हूँ...मेरे लिए सब रुका हुआ है. उसने मेरे चेहरे को अपनी हथेलियों में भरा है और पूरा आसमान तारों के साथ नीचे झुक आता है कि जब उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए हैं...ऑलिव्स...उसके होटों का स्वाद...थोड़ा नमकीन, थोड़ा अबूझ...हमने लास्ट ड्रिंक कौन सी पी थी? मार्टीनी...मैंने आखिरी बार सांस कब ली थी? याद...
आँखें खोलती हूँ तो हलके अँधेरे की नर्म बाँहें पाती हूँ...अपने इर्द गिर्द. सामने पर्दा है और साथ की सीट पर जे. फिल्म के क्रेडिट्स आ रहे हैं. उसने मेरा हाथ अपने हाथों में लिया हुआ है. हाल लगभग खाली हो चूका है. ये पूरी फिल्म परदे से उतर आये थी मन में...याद करने की कोशिश करती हूँ, फिल्म का नाम क्या था...हाँ...डॉक्टर ज़िवागो. अगली किसी बार फिर देखूंगी.
ड्राइव करते हुए सिग्नल पर उसके चेहरे को गौर से देखा, उसकी आँखें...रौशनी में हलकी भूरे रंग की...लगभग सुनहली...होठ...ऑलिव्स...मेरे चेहरे पर कोई रंग उतर आया होगा शायद. उसकी आँखों से मैं कैसी दिखती होउंगी? मैं अक्सर एक हाथ से स्टेयरिंग पकड़ती हूँ और दूसरा हाथ गियर पर रहता है. जे ने मेरे हाथ पर हाथ रखा था...और जैसे खुद से कहा था 'मुझे कभी कभी डर लगता है, आई विल फाल इन लव विद यू, मुझे प्यार सम्हालना नहीं आता. फिर तुम भी मुझसे बहुत दूर हो जाओगी, आई कीप लूजिंग पीपल आल द टाइम'. उसे मेरे खो जाने का डर था. इस इतनी बड़ी दुनिया में, जहाँ मेरे होने का कोई सबूत नहीं...उसे मेरे खो जाने का डर था...सिर्फ उसके डर से ऐसा लगा जैसे मेरा अचानक से कोई वजूद हो गया हो. मुकम्मल.
मैं बहुत देर शहर की सड़कों पर कार चलाती रही...मेरे हाथ पर उसका हाथ बराबर बना रहा...मोजार्ट यहाँ भी अपना जादू बिखेर रहा था. हमने मैक डी के ड्राइव इन से कुछ खाने का उठाया...शाम के रंग खुली सड़कों पर उतर रहे थे. हाइवे पर कार साइड कर के पार्क कर दी. यहाँ से डूबता सूरज दिखता था. पुल के नीचे वाइनयार्ड्स थे. सामने एक छोटी पहाड़ी के साथ लगा एक छोटा तालाब था. यहाँ बहुत सुकून मिलता था, हमेशा. किसी के साथ सनसेट शेयर करना एक बेहद प्राइवेट सी चीज़ होती है. जैसे वो जिंदगी का बहुत जरूरी हिस्सा हो. बर्गर, आइस टी और फ्राईज...शायद सबसे सिंपल चीज़ होती...पर उस दिन बेहद ख़ास थी. इस उम्र में कोलेज स्टूडेंट्स की तरह खाना नहीं खाते...थोड़ा हार्ट का ध्यान रखना पड़ता है, कैलोरीज गिननी पड़ती है. अकेली रहती हूँ तो हेल्थ का ध्यान रखती हूँ. पर आज...आज इतना सोचना नहीं था.
कल मंडे हो जाएगा...ऑफिस...फिर उससे कब मिलना होगा...हफ्ते भर तो एकदम फुर्सत नहीं मिलती है. अँधेरा गहराने के साथ उससे अलग होने की हलकी उदासी महसूस होने लगी थी. शहर लौटने का वक़्त हो गया था. वो मुझे अपने बचपन के किस्से सुना रहा था. कैसे उसने कार चलानी सीखी...कैसे उसके भाई बहन उसे बेहद चिढ़ाते थे. यहाँ उसे अपनी मम्मी की बहुत याद आती है. वो कविता भी लिखता है...उसने कुछ पंक्तियाँ भी सुनायीं मुझे...
I .can't. put. together. the. mosaic. of. your. face
nor recreate the way you call my name.
nor recreate the way you call my name.
पहली पंक्ति के हर शब्द पर ठहरा था वो...उसकी आवाज़ जैसे रेगमाल थी...रूह के तीखे टुकड़े मुलायम कर रही थी...या खुदा! सुकून के पुरकशिश लम्हे...मैं इस लम्हे मर जाऊं तो कितना अच्छा हो. उसके घर के आगे कार रोकी...मैं कोई नदी हो गयी थी...कोई समंदर. उसकी पेशानी पर हलके से चूमा था मैंने...'टेक केयर माय लव'. फिर एक मिनट की ड्राइव घर तक...पार्किंग...लिफ्ट...घर का ताला...
व्हिस्की काफी जल्दी ख़त्म कर दी थी मैंने आज...बर्फ पिघलने के काफी पहले...बचपन में मुझे बर्फ खाना बहुत पसंद था...आज फिर बर्फ का एक छोटा क्यूब मुंह में रखा था...ऑलिव्स याद आये मुझे...ग्रीन...उनका कच्चापन...नमक...समंदर...नींद के आते आते भी कहीं ज्वारभाटा आया था.
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लौटना किरदार तक...बार बार...चाहना...कहना विदा.
फिर उसका पुकारना कि सर्द जनवरियों की याद...जाने न दे, कोहरे के पार बुलाये...रंग, दृश्य, देश, खुलता जाए हर तिलिस्म...इश्क करना...किरदार से...
फिर सुबह का ऑफिस...फुर्सत चाहिए...थोड़ी इत्मीनान वाली फुर्सत...थोड़ी सुकून वाली फुर्सत...आज के लिए इतना. बस. शेष फिर.
रोचक, नशे के बाद हिचक चली जाती है, नृत्य के लिये शरीर साथ देने लगता है। नशा केवल बोतलों तक ही सीमित नहीं, पूरा परिक्षेत्र व्यापकता से विद्यमान है।
ReplyDeleteरोचक। एक रूमानी खुमार सा चढ़ने लगता है आपको पढ़ते हुए पूजा जी।
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