दिल फाल्टलाईन पर बसा एक शहर है...माउंट वेसुवियस के करीब...बसता है, उजड़ता है...हर कुछ दिन में झटके महसूस होते हैं यहाँ बने मकानों पर. भूकंप से बचने वाली इमारतें बनायीं गयीं हैं यहाँ. उनकी नींव में लगे हैं रोलर प्लेट्स कि बड़े झटकों के साथ पूरी इमारत झूम जाए मगर गिर कर बर्बाद न हो.
यहाँ के कवियों की हैण्डराईटिंग बेहद ख़राब होती है...कई बार तो इतनी कि डाकिये ने गलत लोगों के पास चिट्ठियां दे दी हैं...अब डाकिये की गलती भी नहीं कह सकते कि हर ख़त पर बस इतना ही लिखा होता है 'जानां'. खुदा इन्हें समझाए कि महबूब का नाम भी होता है. उनके लिए तो दुनिया में उनके महबूब के सिवा और कोई रहता ही नहीं...कवि वैसे भी समझ से परे का जीव होता है...डाकिये की दुविधा के लिए उसके पास वक़्त नहीं होता. वो तो महबूब के लिए उर्वर काली मिटटी में लाल और नीले गुलाबों की कलमें रोपने में व्यस्त रहता है कि बीते वसंत जानां ने कहा था कि उसे नीले गुलाब बहुत पसंद हैं.
थरथराहट में गुम ये शहर नशे में डोलता रहता है...यहाँ हर चौराहे पर मयखाने हैं. इस शहर में आने वाले मुसाफिर अक्सर यहीं तम्बू गाड़ कर रहने के स्वप्न ताउम्र देखते रहते हैं. उनके खुद से किये कितने झूठे वादे होते हैं. इस शहर की लड़कियां मुसाफिरों पर जान देती हैं...इंतज़ार के अश्कों में खिलखिलाता इस शहर का चश्मे-शाही इतना मीठा पानी देता है कि यकीन करना मुश्किल होता है कि ये आंसुओं से सदाबहार रहता है. शहर के दो छोरों पर दो बड़ी झीलें हैं और उन्हें जोड़ती नदी है...अश्कगंगा...पुरखे कहते हैं कि वो आकाश गंगा की सहेली है. आकाश गंगा के कितने सितारे इस नदी पर मर मिटे थे...लेकिन नदी की किस्मत में प्यास लिखी थी...मुसाफिर सितारे इसी नदी में डूब कर जान दे देते थे. आज भी गहरे गोता मरने वालों को सितारे के टूटे हिस्से मिलते हैं.
इस शहर के सारे लोग किस्सागो हैं. वे पूरी दुनिया घूम कर वापस इसी शहर के किसी मुसाफिरखाने में पाए जाते हैं. जैसा कि हर शहर में होता है...लोगों के बहुत सारे काम धंधे हैं मगर इस शहर के लोगों की खासियत कलम बनाना है. बाहर की दुनिया में लोग ऐसा कहते हैं कि इस क्षणभंगुर शहर के लोगों पर खुदा की नेमत है. उनकी बनायीं हुयी कलमों में सियाही कभी नहीं सूखती. शहर के कवियों को जब अपनी प्रेमिकाओं के लिए गुलाब की कलमें लगाने से फुर्सत मिलती है तो वे कमाल की कविताएँ लिखते हैं.
दिल तो कर रहा है आपको एक कहानी सुनाऊं, इस शहर में एक जो लड़की रहती थी, नाम था जिसका जिंदगी...मगर जाने दो...फिर कभी.
यहाँ के कवियों की हैण्डराईटिंग बेहद ख़राब होती है...कई बार तो इतनी कि डाकिये ने गलत लोगों के पास चिट्ठियां दे दी हैं...अब डाकिये की गलती भी नहीं कह सकते कि हर ख़त पर बस इतना ही लिखा होता है 'जानां'. खुदा इन्हें समझाए कि महबूब का नाम भी होता है. उनके लिए तो दुनिया में उनके महबूब के सिवा और कोई रहता ही नहीं...कवि वैसे भी समझ से परे का जीव होता है...डाकिये की दुविधा के लिए उसके पास वक़्त नहीं होता. वो तो महबूब के लिए उर्वर काली मिटटी में लाल और नीले गुलाबों की कलमें रोपने में व्यस्त रहता है कि बीते वसंत जानां ने कहा था कि उसे नीले गुलाब बहुत पसंद हैं.
थरथराहट में गुम ये शहर नशे में डोलता रहता है...यहाँ हर चौराहे पर मयखाने हैं. इस शहर में आने वाले मुसाफिर अक्सर यहीं तम्बू गाड़ कर रहने के स्वप्न ताउम्र देखते रहते हैं. उनके खुद से किये कितने झूठे वादे होते हैं. इस शहर की लड़कियां मुसाफिरों पर जान देती हैं...इंतज़ार के अश्कों में खिलखिलाता इस शहर का चश्मे-शाही इतना मीठा पानी देता है कि यकीन करना मुश्किल होता है कि ये आंसुओं से सदाबहार रहता है. शहर के दो छोरों पर दो बड़ी झीलें हैं और उन्हें जोड़ती नदी है...अश्कगंगा...पुरखे कहते हैं कि वो आकाश गंगा की सहेली है. आकाश गंगा के कितने सितारे इस नदी पर मर मिटे थे...लेकिन नदी की किस्मत में प्यास लिखी थी...मुसाफिर सितारे इसी नदी में डूब कर जान दे देते थे. आज भी गहरे गोता मरने वालों को सितारे के टूटे हिस्से मिलते हैं.
इस शहर के सारे लोग किस्सागो हैं. वे पूरी दुनिया घूम कर वापस इसी शहर के किसी मुसाफिरखाने में पाए जाते हैं. जैसा कि हर शहर में होता है...लोगों के बहुत सारे काम धंधे हैं मगर इस शहर के लोगों की खासियत कलम बनाना है. बाहर की दुनिया में लोग ऐसा कहते हैं कि इस क्षणभंगुर शहर के लोगों पर खुदा की नेमत है. उनकी बनायीं हुयी कलमों में सियाही कभी नहीं सूखती. शहर के कवियों को जब अपनी प्रेमिकाओं के लिए गुलाब की कलमें लगाने से फुर्सत मिलती है तो वे कमाल की कविताएँ लिखते हैं.
दिल तो कर रहा है आपको एक कहानी सुनाऊं, इस शहर में एक जो लड़की रहती थी, नाम था जिसका जिंदगी...मगर जाने दो...फिर कभी.

गज़ब
ReplyDeleteवाह, बहुत खूब
ReplyDeleteदिल को जाने!
ReplyDeleteशेष रहा क्या,
जो पहचाने।
kuch kahna zaroori hi nahin is post par... bas ek smile le lo... :-)
ReplyDeleteकि बीते वसंत जानां ने कहा था कि उसे नीले गुलाब बहुत पसंद हैं... :)
ReplyDeleteक्या कहूं काश उस शहर के वाशिंदों में हमारा भी नाम होता लेकिन हमने तो तो दूसरी ट्रेन का टिकट ले रखा है ये तो कहीं और ले जाएगी ..
ReplyDeleteखुबसूरत किस्सागो
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