04 April, 2014

स्मोकिंग। इश्क़

लड़की थी। सिगरेट का आखिरी कश। तलब। इंतजार का चुभता स्वाद। ऐब्सिन्थ विद शुगर। टकीला शॉट। नीट स्कॉच विदाउट आईस। प्योर ड्रग। 
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आधी भरी डिब्बी से सिगरेट निकाली, बहुत देर तक उसे यकीन नहीं हुआ कि खुदा ऐसी गलती भी कर सकता है। दरगाह के बाहर के फकीर ने उसके माथे पर हाथ रख कर दुआ दी थी, तुम्हारी रूह को तुम्हारे जिस्म से आजाद करता हूँ। चाहे कितनी भी खरोंचें आ जाएं जिस्म पर, तुम्हारी रूह हमेशा यूँ ही रहेगी, दुआओं की खुश्बू से सराबोर, इश्क़ से लबालब। बांटने में कभी तुम्हारा हाथ तंग नहीं होगा। फिर कैसे हो गया था ऐसा, जिस्म पर खरोंच का एक निशान भी नहीं...दर्द इतना गहरा कि लगता था रूह में ज़ख्म हों। झूठा फकीर था या कि इश्क़? 

इस न समझ आने वाली दुनिया में उसकी सुरक्षा के लिए सिर्फ चुप्पी थी। ख़ामोशी से उसे सारी जद्दोजहद महसूस करनी थी। उसके सारे ख़त उसके सीने में दफ़न होने वाले थे। सिगरेट की डिब्बी पड़ी हुयी थी। उसने पहली सिगरेट निकाली और गहरी सियाही वाली कलम से ऊपर लिखा 'आई लव यू'। कितना कुछ कहना चाहती थी उससे मगर इससे ज्यादा तकलीफ होती तो मर जाती वो। सेल्फ प्रिजर्वेशन भी जरूरी है। लाइटर की लौ उसकी आँखों में इस तरह लपकती जैसे सब कुछ ख़ाक करना का माद्दा रखती हो। हर स्पर्श, हर चुम्बन, मुस्कराहट का हर लम्हा जो रूह पर छाप छोड़ गया है जलता जाता। उसका नाम लेना चाहती मगर हर कश के साथ होंठ जल उठते। 'ही लव्स मी'। हर दूसरी सिगरेट के साथ दुनिया एक गहरा समंदर बन जाती जिसमें उसके पैर जमीन से बहुत ऊपर थे। किनारा बहुत दूर। सांस एक ही थी। गहरी। डूबने के जरा सा पहले। 'ही लव्स मी नॉट'। 

चेन स्मोकिंग। इश्क़ जैसा ही है न। एक ख़त्म होते ही दूसरे की तलब लगती है। 

पहला पैकेट ख़त्म होने पर भी होश बाकी थे। जबकि ऐसा कोई वादा नहीं था, फिर भी लड़की को धोखा होता था कि इश्क़ कहीं होगा आसपास ही, छुपा हुआ। इश्क़ को होना चाहिए था। इतनी तकलीफ में वो उसे अकेला कैसे छोड़ सकता है। कहीं तो छुप के बैठा होगा। आखिरी सिगरेट के आखिरी कश में शायद। बाकी सिगरेटों में उसकी तलाश जारी रही। 'ही लव्स मी, ही लव्स मी नॉट'। 

लिक्विड आँखें थी उसकी। गहरी सियाह। लड़की ने घूँट घूँट उतारा है उन आँखों को खुद के अंदर। कितनी मुखर। कितने सारे कवियों की भाषा समझतीं। उसकी आँखें कुछ कहने नहीं देती लड़की को। सिर्फ चूमते हुए चुप होतीं...मगर उस वक्त लड़की के शब्द खो जाते। उन आँखों को देख कर उसका ब्लैक इंक से लिखने को जी चाहता। 

गहरे ज़ख्म थे। खुले हुए। यूँ भरने में बहुत वक्त लगता। सिगरेट पर उसने लिखा था 'यू टच्ड मी हियर'। सिगरेट सुई थी, धुएँ का धागा और सारे ज़ख्मों पर टाँके लगाने थे। धुआँ बहुत रहमदिल था। चूमता जाता जैसे कि जादू हो। हर टाँके के साथ लड़की का यकीन कुछ और पक्का होता जाता कि आँसुओं के खारे पानी में एक दिन गोता लगाने का हुनर सीख लेगी। जिद्दी थी बहुत। अपनी तकलीफों से कहीं ज्यादा। 

समंदर ने लड़की की साँसें अपने पास जमा रखी थीं। उसे मालूम था कि बिना तैरना जाने, बिना किसी ऑक्सीजन मास्क के, पगली फिर से डीप डाइव मारने आएगी। उसके क़त्ल का इल्ज़ाम समंदर अपने सर नहीं चाहता था। उसने लहरों के हाथ संदेशे भेजे। लड़की की आँखों का खारा पानी समंदर को पागल किये जा रहा था। समंदर पूरी दुनिया को बाँहों में भर कर तोड़ देना चाहता था। डुबा देना चाहता था वो टापू जिसके किनारे लड़की ने उसके होंठ चूमे थे और अब जान देने की जिद किये बैठी थी। समंदर के पास कोई चाँद वाली बुढ़िया भी नहीं थी जो लड़की को समझाती कि ईश्क़ को वोलंटरी रिटायरमेंट लिए बहुत वक़्त हुआ। डांट का असर लड़की पर होना नहीं था। 


मजबूर समंदर के पास कोई चारा नहीं बचा था। उसकी लहरों ने लड़की की सिगरेट पैकेट से सारे लफ्ज़ मिटा दिए। उसकी यादों से वो सारे लम्हे धुल गये कि जो उसकी साँस में अटक रहे थे। लिक्विड आँखें। सीली मुस्कुराहटें। उसकी बाँहों का कसाव। उसकी आवाज में पुकारा गया नाम। बस आखिरी सिगरेट पर का आखिरी लफ्ज़ मिटाते हुए समंदर भी रो पड़ा...बेहोश लड़की की उँगलियों में फँसी हुयी आखिरी सूखी सिगरेट थी...उसपर लिखा हुआ था 'ही लव्स मी नॉट'। 

6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 05 अप्रेल 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 05/04/2014 को "कभी उफ़ नहीं की
    " :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1573
    पर.

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  3. सुन्दर भाव लिए रचना |

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  4. बहुत बेहतरीन व प्रेरक रचना , आ. पूजा जी धन्यवाद ! I.A.S.I.H ( हिंदी जानकारियाँ )
    हिंदी ब्लॉग जगत में एक नए ब्लॉग की शुरुवात हुई है कृपया आप सब से विनती है कि एक बार अवश्य पधारें , व अपना सुझाव जरूर रक्खें , धन्यवाद ! ~ ज़िन्दगी मेरे साथ - बोलो बिंदास ! ~ ( एक ऐसा ब्लॉग -जो जिंदगी से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताता है )

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  5. विशेष प्रयोग करता है ईश्वर भी। जितनी मन में उत्कण्ठा होती है, उतनी ही गहराई दिखाता है जीवन में वह।

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